Bhagwatam · Article
चैतन्य महाप्रभु और रामानंद राय के संवाद
(रामानंद संवाद) में भगवद गीता के कुछ महत्वपूर्ण श्लोक उद्धृत किए गए हैं।
ये श्लोक मुख्यतः प्रारंभिक स्तर (धर्म, कर्म, त्याग) को दर्शाते हैं — जिन्हें महाप्रभु “eho bāhya” कहकर आगे बढ़ाते हैं।
गीता के प्रमुख श्लोक (रामानंद संवाद में)
1. वर्णाश्रम धर्म
गीता 18.45
स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः।
स्वकर्मनिरतः सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु॥
अर्थ: अपने-अपने कर्तव्यों का पालन करने से मनुष्य सिद्धि प्राप्त करता है
महाप्रभु: “यह बाह्य है”
2. कर्म भगवान को अर्पण
गीता 9.27
यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत्।
यत्तपस्यसि कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम्॥
अर्थ: जो भी करो, भगवान को अर्पण करो
अभी भी अंतिम नहीं
3. सर्वधर्म त्याग (शरणागति)
गीता 18.66
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
अर्थ: सब धर्म छोड़कर मेरी शरण में आओ
महाप्रभु:
“यह भी अंतिम नहीं — आगे कहो”