भाद्रपद मास के पर्व
हिंदू परंपरा में मुख्यतः चंद्र अथवा चांद्र-सौर पंचांग का अनुसरण किया जाता है, जिसमें वर्ष को बारह चंद्र मासों में विभाजित किया गया है—
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हिंदू परंपरा में मुख्यतः चंद्र अथवा चांद्र-सौर पंचांग का अनुसरण किया जाता है, जिसमें वर्ष को बारह चंद्र मासों में विभाजित किया गया है—
पूरा पढ़ेंविज्ञान, विस्मय और श्रद्धा पर एक चिंतन
पूरा पढ़ेंकपूयाचरण का अर्थ — कपूय अर्थात अशुद्ध/अनुचित और आचरण अर्थात व्यवहार। ऐसे विचार, भाव और व्यवहार जो हमारी साधना एवं अन्तःकरण की शुद्धि में बाधक बनते हैं, कपूयाचरण कहलाते हैं।
पूरा पढ़ेंब्रह्माण्ड = ब्रह्म (परम सत्य) + अण्ड (अंडाकार संरचना)
पूरा पढ़ेंभूमिका
पूरा पढ़ेंयह विषय बहुत सुंदर और गहरा है। आइए इसे सरल, स्पष्ट और व्यवस्थित हिन्दी में समझते हैं:
पूरा पढ़ेंरामानंद राय और चैतन्य महाप्रभु का यह दिव्य संवाद चैतन्य चरितामृत (मध्य-लीला अध्याय 8–9) में वर्णित है।
पूरा पढ़ेंये श्लोक मुख्यतः प्रारंभिक स्तर (धर्म, कर्म, त्याग) को दर्शाते हैं — जिन्हें महाप्रभु “eho bāhya” कहकर आगे बढ़ाते हैं।
पूरा पढ़ेंनाम: विदुर
पूरा पढ़ेंऋषि मांडव्य पर अन्याय
पूरा पढ़ेंनाम: मैत्रेय ऋषि
पूरा पढ़ेंये दोनों अलग नहीं, बल्कि दो स्तरों पर सृष्टि का वर्णन हैं:
पूरा पढ़ेंकर्दम ऋषि ब्रह्मा जी के मानस पुत्र (mind-born son) थे।
पूरा पढ़ेंदेवहूति स्वायंभुव मनु और शतरूपा की पुत्री थीं।
पूरा पढ़ेंकपिल मुनि भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं।
पूरा पढ़ेंमूल सिद्धांत (Core Idea)
पूरा पढ़ें(मुख्य संदर्भ: श्रीमद्भागवतम्, स्कंध 5, अध्याय 21–23)
पूरा पढ़ेंप्रस्तावना
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